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    क्या आप जानते हैं? महाराजा विक्रमादित्य ने 57 ईसा पूर्व विदेशी आक्रमणकारी शकों पर विजय पाने की स्मृति में विक्रम संवत को शुरू किया था। जो सौर-चंद्र पर आधारित है। 

    क्या आप जानते हैं? महाराजा विक्रमादित्य ने 57 ईसा पूर्व विदेशी आक्रमणकारी शकों पर विजय पाने की स्मृति में विक्रम संवत को शुरू किया था। जो सौर-चंद्र पर आधारित है। 

    इस पंचाग में नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी कि मार्च और अप्रैल के महीने में होती है इसी हिंदू पंचाग के अनुसार ही हिंदू नववर्ष, शुभ मुहूर्त और हिंदू त्योहारों की तिथियों की गणना होती है।

    भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित यह पंचाग अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 57-58 वर्ष आगे है। और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि विक्रम संवत पंचाग नेपाल का आधिकारिक और प्रशासनिक कैलेंडर है। 

    और हाँ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 इस साल 19 मार्च 2026 दिन गुरूवार को मनाया जाएगा। 

    हिंदू नववर्ष को भारत के अलग अलग हिस्सों में भिन्न भिन्न तरीके से मनाया जाता है —

    — महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा

    — दक्षिण भारत में उगादी

    — कश्मीर में नवरेह

    — पंजाब में बैसाखी

    — केरल में विशु

    — पश्चिम बंगाल में पोइला बोइशाख

    — मणिपुर में सजिबु चेराओबा 

    विक्रम संवत 2083: इतिहास, महत्व और हिंदू नववर्ष 2026

    विक्रम संवत क्या है?

    विक्रम संवत भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित एक प्राचीन हिंदू पंचांग प्रणाली है, जिसकी शुरुआत पारंपरिक मान्यता के अनुसार 57 ईसा पूर्व मानी जाती है। इतिहास और लोककथाओं के अनुसार इसकी स्थापना महाराजा विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय की खुशी में की गई थी।

    यह पंचांग सौर-चंद्र (Lunisolar) गणना पद्धति पर आधारित है, जिसमें सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति के अनुसार तिथियों और हिंदी के महीनों का निर्धारण किया जाता है।

    विक्रम संवत की प्रमुख विशेषताएं‌ भी हैं, 

    नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है (मार्च–अप्रैल)

    हिंदू त्योहार, व्रत, शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय गणना इसी पंचांग से निर्धारित की जाती है। 

    ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 57–58 वर्ष आगे है, 

    नेपाल में आधिकारिक प्रशासनिक कैलेंडर के रूप में मान्यता प्राप्त है। 

    हिंदू नववर्ष 2026 (विक्रम संवत 2083) कब है?

    हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होगी।

    यह दिन भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ माना जाता है और नए कार्यों की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ समय समझा जाता है।

    भारत में हिंदू नववर्ष के विभिन्न नाम

    भारत के अलग-अलग राज्यों में हिंदू नववर्ष को विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है:

    महाराष्ट्र – गुड़ी पड़वा

    आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना – उगादी

    कश्मीर – नवरेह

    पंजाब – बैसाखी

    केरल – विशु

    पश्चिम बंगाल – पोइला बोइशाख

    मणिपुर – सजिबु चेराओबा

    इन सभी पर्वों का मूल आधार भारतीय पंचांग की परंपरा है।

    विक्रम संवत का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

    विक्रम संवत केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर्म और ज्योतिष का आधार है। विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, (नवरात्र होली दीपावली) जैसे त्योहारों की तिथियां और धार्मिक अनुष्ठान इसी पंचांग के अनुसार तय किए जाते हैं।

    नेपाल में आज भी विक्रम संवत आधिकारिक कैलेंडर के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता स्पष्ट होती है।

    निष्कर्ष

    विक्रम संवत भारतीय सभ्यता की प्राचीन विरासत का प्रतीक है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाला हिंदू नववर्ष देशभर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य नई ऊर्जा, सकारात्मकता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देना है।

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